Archive for January, 2010

बापू क्यों हँसा

Friday, January 29th, 2010

मुन्नाभाई : ए सर्किट ये बापू हर नोट पे हंसते हुए क्यों रहते है?
सर्किट : सिंपल भाई… बापू रोयेगा तो नोट गीला हो जाएगा ना! इसलिए

दत्तु पहलवान टिकिट नहीं लेता

Thursday, January 28th, 2010

एक बस कंडक्टर यात्रियों से तो टिकिट देता हुआ एक लम्बे चौड़े पहलवान के पास पंहुचा और बोला “टिकिट”
“दत्तु पहलवान टिकिट नहीं लेता!” पहलवान बोला
कंडक्टर की हिम्मत नहीं उससे उलझने की, सो आगे बढ़ गया

अगले दिन पहलवान फिर बस में चढ़ा, कंडक्टर उसके पास पंहुचा तो जवाब मिला “दत्तु पहलवान टिकिट नहीं लेता!”
कंडक्टर में हिम्मत नहीं थी… फिर चला गया… पर जब ऐसा कई दिनों तक चला तो उसने आखिर निर्णय ले ही लिया…

अगले दिन उसने एक जिम ज्वाइन किया, और साथ ही कुंग फु कराते सीखना शुरू किया…
तीन महीने में उससने अच्छी बॉडी बना ली. अब वह पहलवान का सामना करने के लिए तैयार था.

अब की बार जब कंडक्टर टिकिट लेने पंहुचा और पहलवान ने गरज कर कहा “दत्तु पहलवान टिकिट नहीं लेता!” तो दुगुनी तेज आवाज में कंडक्टर गुर्राया
“दत्तु पहलवान टिकिट क्यों नहीं लेता?”
पहलवान घबरा गया और बिल्ली के जैसी पतली आवाज में बोला
“क्योकि दत्तु पहलवान के पास ‘पास’ है”

एक मच्छर

Wednesday, January 27th, 2010
ट्रेन में सफ़र करते हुए एक चीनी व्यक्ति के सर पे एक मच्छर बैठ गया, चीनी ने उसे पकड़ा और खा गया
थोड़ी देर में पास बैठे एक बनिए के सर पे एक मच्छर बैठ गया. बनिया ने झट से से पकड़ लिया और चीनी से पूछा ‘इसे खरीदोगे?’

भाई जान

Tuesday, January 26th, 2010

एक लड़की ने लड़के को आवाज लगाई
ओ… भाई जान… सुनिए तो ज़रा

लड़का बोला… ओये… कंफ्युस क्यों कर रही है…
पहले पक्का कर ले… भाई या जान

राज़!

Tuesday, January 26th, 2010

एक प्रेस वाला लालूजी से पूछता है
“आप ने घर में 11 बच्चे कैसे किये?”
लालूजी बोले “क्यूंकि हम रबड़ से ज्यादा राबड़ी को युस किया हु..”

पति पत्नी और वो

Monday, January 25th, 2010

पति : आज चिकन बहुत टेस्टी बना है! क्या कोई ख़ास मसाला डाला है?
पत्नी : नहीं जी… मुर्गी जरा जल गयी थी तो BURNOL लगाया है!

बंदरवा का फोटू

Monday, January 25th, 2010

लालू एक बार एक दुकान में गए और पूछने लगे
“ये बंदरवा का फोटू कितने का है?”
दूकानदार : वो फुटवा नहीं शीशा (आईना) है!

सबसे बड़ा सुख

Sunday, January 24th, 2010

शहर के एक नामी पार्क में दो मूर्तियाँ सालो से एक दुसरे की और मुंह करके खड़ी थी. इसमे एक मूर्ति आदमी की थी और एक औरत की.

एक दिन एक फ़रिश्ता वह से गुजरा. उसने मूर्तियों को देख कर कहा “तुमने सालो तक यहाँ खड़े रह कर अनेक लोगो का मनोरंजन किया है. में तुम्हे इसके बदले जीवन का वरदान देता हु. तुम्हारे पास आधा घंटा है. इस आधे घंटे में तुम जो करना चाहो कर लो.”

फ़रिश्ते की बात खत्म होते ही दोनों मूर्तियाँ जीवित हो उठी. दोनों एक दुसरे को देख के मुस्कुराए और फिर पास के जंगल में झाड़ियों के पीछे चले गए.

झाड़ियों के हिलाने और दोनों के हसने खिलखिलाने की आवाज सुन कर फ़रिश्ता मुस्कुरा उठा. उसने दोनों मूर्तियों के जीवन की सबसे बड़ी इच्छा पूरी की थी. १५ मिनट बात जब दोनों बाहर निकले तो दोनों के चेहरे पर ख़ुशी और संतोष के भाव थे. फ़रिश्ते ने घडी देखि और कहा “अभी तम्हारे पास पंद्रह मिनट और है, क्या तुम फिर से सब करना चाहोगे?”

आदमी की मूर्ति ने औरत से पूछा “फिर से करे?”

औरत की मूर्ति ने खुश हो कर कहा “हाँ … पर इस बार कबूतर तो तुम पकड़ना और उसके सर पर बीट मैं करुँगी”

बेटा बाप से बढ़कर

Sunday, January 24th, 2010

बाप: बेटा शादी के दिन ससुराल वाले
घडी दे तो सूट मांग लेना
स्कूटर दे तो कार मांग लेना
दूकान दे तो घर…
बेटा: डैडी, लड़की दे तो उसकी माँ मांग लू

जागो रे चम्पू

Saturday, January 23rd, 2010

परेशान थी चम्पू की wife
non-happening थी जो उसकी life
चम्पू को न मिलता था आराम
office में करता काम ही काम

चम्पू के boss भी थे बड़े cool
promotion को हर बार जाते थे भूल
पर भूलते नहीं थे वो deadline
काम वो करवाते थे रोज़ till nine

चम्पू भी बनना चाहता था best
इसलिए तो वो नहीं करता था rest
दिन रात करता वो बॉस की गुलामी
onsite की उम्मीद में देता सलामी

दिन गुजरे और फिर गुजरे साल
बुरा होता गया चम्पू का हाल
चम्पू को अब कुछ याद न रहता था
गलती से बीवी को बहनजी कहता था

आखिर एक दिन चम्पू को समझ आया
और छोड़ दी उसने onsite की मोह माया
boss से बोला “तुम क्यों सताते हो?”
“onsite के लड्डू से बुद्धू बनाते हो”

“promotion दो वरना चला जाऊँगा”
“onsite देने पर भी वापिस न आऊंगा”
boss हँस के बोला “नहीं कोई बात”
“अभी और भी चम्पू है मेरे पास”

“ये दुनिया चंपुओं से भरी है”
“सबको बस आगे बढ़ने की पड़ी है”
“तुम न करोगे तो किसी और से कराऊंगा ”
“तुम्हारी तरह एक और चम्पू बनाऊंगा”

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