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May 5th, 2010 by admin
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तेरी माँ का… कुछ अटपटा नहीं लगा ये नाम?
इस नाम के पीछे भी एक जोक है जो मैंने टीवी पर किसी प्रोग्राम में देखा था

शादी, मुंडन या कोई अन्य फंक्शन हो पंडित मिले न मिले DJ सिस्टम जरुर मिल जाएगा
अडोस पड़ोस में चाहे सब को तकलीफ हो, पर गाने जोर जोर से बजेंगे
काँटा लगा… चमचम करता है ये नशीला बदन…

यदि फंक्शन का सम्बन्ध किसी NRI से हो तो ‘घर आजा परदेसी तेरा देश बुलाये रे…’ जैसे गाने भी बजेंगे इमोशनल टच देने के लिए…
ऐसे किसी फंक्शन में गाना बज रहा था, पंकज उधास का ‘चिट्ठी आई है…’

बड़े दिनों के बाद, हम बे-वतनो को आज…
वतन की मिटटी आई है…
चिट्ठी आई है, आई है, चिट्ठी आई है…

मैं तो बाप हु, मेरा क्या है….

गौर से सुनियेगा, अगली पंक्ति होनी चाहिए “तेरी माँ का हाल बुरा है…” पर बुरा हो पायरेटेड सीडी का जो ऐसे नाजुक समय पर अटक गयी और बार बार कुछ शब्द रिपीट होने लगे

मैं तो बाप हु, मेरा क्या है….
तेरी माँ का…. (सीडी अटकी) तेरी माँ का… तेरी माँ का…
तेरी माँ का…

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